Manager

Manager

सद्गुरु कृपा एवं प्रेरणा स्मरण मैं राजेंद्र बिष्ट—श्री कल्याण सेवा आश्रम एवं 'कल्याणिका शिक्षा निकेतन' के संस्थापक, परम पूज्य सद्गुरुदेव तपस्वी बाबा कल्याण दास जी महाराज का अनन्य शिष्य हूँ। सद्गुरुदेव जी के कृपापात्र एवं न्यासी पूज्य हिमाद्रि मुनि महाराज जी के दिव्य साानिध्य में जो संस्कार मुझे प्राप्त हुए हैं और सद्गुरुदेव जी से जो वचन एवं मार्गदर्शन मुझे मिले हैं, उन्हीं को ध्येय वाक्य मानकर मैं यह विचार प्रस्तुत कर रहा हूँ। ​शिक्षा का वास्तविक अर्थ शिक्षा केवल सूचनाओं या आंकड़ों का आदान-प्रदान नहीं है, बल्कि यह चरित्र-निर्माण, मानसिक परिष्कार और समाज को नवदिशा प्रदान करने की एक सतत साधना है। एक B.Ed. कॉलेज के सेवक के रूप में मेरा यह दृढ़ विश्वास है कि शिक्षक समाज की वह रीढ़ हैं, जो राष्ट्र के आने वाले कल की नींव रखते हैं। ​शिक्षक प्रशिक्षण: मात्र एक डिग्री नहीं, एक पवित्र दायित्व आधुनिक युग में शिक्षण की तकनीकें और विधियाँ तीव्र गति से बदल रही हैं। तकनीक का समावेश, बाल-केंद्रित शिक्षा (Child-Centered Education) तथा समावेशी कक्षा (Inclusive Classroom) आज की मुख्य आवश्यकताएँ हैं। इस परिपेक्ष्य में B.Ed. का दो वर्षीय पाठ्यक्रम केवल एक व्यावसायिक योग्यता (Professional Qualification) प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह सेवा, समर्पण और उत्कृष्ट दृष्टिकोण (Attitude) विकसित करने की एक आध्यात्मिक व शैक्षणिक यात्रा है। ​एक आदर्श एवं कुशल शिक्षक के निर्माण हेतु निम्नलिखित स्तम्भ अत्यंत आवश्यक हैं: ​सैद्धांतिक व व्यावहारिक ज्ञान का संतुलन: पुस्तकों से ज्ञान अर्जित करने के साथ-साथ इंटर्नशिप और सूक्ष्म-शिक्षण (Micro-teaching) के माध्यम से उसे वास्तविक कक्षा में सफलतापूर्वक लागू करना अनिवार्य है। ​तकनीकी दक्षता (Digital Literacy): स्मार्ट क्लास, डिजिटल टूल्स और नवीन शिक्षण प्रणालियों को अपनाकर समय के साथ खुद को अद्यतन (Update) रखना आज की प्राथमिक मांग है। ​सहानुभूति और धैर्य (Empathy & Patience): प्रत्येक बालक अद्वितीय होता है; उसकी सीखने की गति और क्षमता भिन्न होती है। एक सच्चे शिक्षक का कर्तव्य है कि वह प्रत्येक विद्यार्थी की क्षमता को समझे और धैर्यपूर्वक उसका मार्गदर्शन करे। ​भावी शिक्षकों के नाम संदेश आप केवल कोई एक विषय पढ़ाने नहीं जा रहे हैं, बल्कि आप अपने विद्यार्थियों के जीवन को एक नया आकार देने जा रहे हैं। आपकी कक्षा में बैठा हर एक विद्यार्थी इस देश का उज्ज्वल भविष्य है। ​इसलिए अपने इस प्रशिक्षण काल के प्रत्येक क्षण का पूर्ण उपयोग करें—अनुशासन को आत्मसात करें, शिक्षण में नए प्रयोग करें और प्रतिदिन स्वयं को पहले से बेहतर बनाएं। ​आह्वान आइए, पूज्य सद्गुरुदेव के आशीर्वाद से हम सब मिलकर एक ऐसे शैक्षणिक वातावरण का निर्माण करें, जहाँ केवल किताबी ज्ञान का प्रसार न हो, बल्कि मानवीय मूल्यों, उच्च संस्कारों और नैतिक चेतना का भी सर्वांगीण विकास हो।.

  • “Shri Rajendra Singh Bisht”